डिलीवरी प्लेटफार्म कर्मचारी क्यों हड़ताल पर गए? गिग इकॉनमी, मजदूरी संकट और नए भारत की सबसे बड़ी बहस
मोबाइल ऐप से चलती भूख और थकान से चलती ज़िंदगी
भारत के शहरी जीवन में Zomato सिर्फ एक फूड डिलीवरी ऐप नहीं, बल्कि एक आदत बन चुका है। बारिश हो, रात के 2 बजे भूख लगी हो या ऑफिस में मीटिंग चल रही हो – एक क्लिक और खाना दरवाज़े पर।
लेकिन इस सुविधा के पीछे खड़ा वह चेहरा अक्सर अनदेखा रह जाता है – डिलीवरी पार्टनर।
जब यही डिलीवरी पार्टनर और Zomato से जुड़े कर्मचारी हड़ताल पर गए, तो सवाल उठा – क्या यह सिर्फ पैसे की लड़ाई है या भारत की गिग इकॉनमी का बड़ा संकट?
1. Zomato हड़ताल: घटना की पृष्ठभूमि
Zomato कर्मचारियों और डिलीवरी पार्टनर्स की हड़ताल अचानक नहीं हुई। यह असंतोष महीनों से पनप रहा था।
- प्रति ऑर्डर भुगतान में लगातार कटौती
- इंसेंटिव सिस्टम में बार-बार बदलाव
- पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतें
- बिना नोटिस आईडी ब्लॉक होना
- कोई स्थायी नौकरी सुरक्षा नहीं
कई शहरों – दिल्ली, बेंगलुरु, हैदराबाद, मुंबई, लखनऊ और कोलकाता – में डिलीवरी पार्टनर्स ने एक साथ काम बंद किया।
2. Zomato कर्मचारी कौन हैं?
यह समझना ज़रूरी है कि Zomato में “कर्मचारी” शब्द एक जैसा नहीं है।
🔹 (1) डिलीवरी पार्टनर
जो बाइक या साइकिल से खाना पहुंचाते हैं। कंपनी इन्हें कर्मचारी नहीं बल्कि Independent Partner कहती है।
🔹 (2) फील्ड और सपोर्ट स्टाफ
ग्राउंड ऑपरेशन, रेस्तरां को जोड़ना, कस्टमर सपोर्ट।
🔹 (3) वेयरहाउस और क्विक डिलीवरी स्टाफ
Zomato Blinkit जैसी सेवाओं से जुड़े कर्मचारी।
3. Zomato कर्मचारियों की प्रमुख मांगें
① न्यूनतम गारंटीड कमाई
डिलीवरी पार्टनर्स का कहना है कि:
- पहले ₹35–40 प्रति ऑर्डर मिलता था
- अब कई जगह ₹20–25 तक आ गया
- इंसेंटिव अनिश्चित और जटिल हैं
उनकी मांग: हर दिन और हर घंटे की न्यूनतम गारंटी।
② ईंधन महंगाई का मुआवजा
जब पेट्रोल ₹100+ हो, तो डिलीवरी चार्ज वही क्यों?
③ बीमा और सामाजिक सुरक्षा
- दुर्घटना बीमा
- स्वास्थ्य बीमा
- मृत्यु पर परिवार को सहायता
④ एल्गोरिदम की तानाशाही खत्म हो
⑤ कर्मचारी का दर्जा या कानूनी सुरक्षा
सबसे बड़ा सवाल: क्या हम कर्मचारी नहीं हैं?
4. Zomato का पक्ष क्या है?
Zomato का आधिकारिक पक्ष है:
- डिलीवरी पार्टनर्स स्वतंत्र हैं
- काम करने की पूरी आज़ादी है
- कमाई ऑर्डर पर निर्भर करती है
- बीमा जैसी सुविधाएं पहले से हैं
कंपनी इसे Flexible Work Model बताती है।
5. लेकिन असली सवाल: नियंत्रण किसका?
अगर पार्टनर स्वतंत्र हैं, तो:
- रेट कंपनी क्यों तय करती है?
- आईडी कंपनी क्यों ब्लॉक करती है?
- काम का समय एल्गोरिदम क्यों तय करता है?
6. कौन-कौन खड़ा है Zomato कर्मचारियों के साथ?
✊ ट्रेड यूनियन
- CITU
- AITUC
- All India Gig Workers Union
🏛️ राजनीतिक दल
- वाम दल
- कुछ क्षेत्रीय पार्टियां
- युवा संगठनों का समर्थन
📢 सिविल सोसाइटी
- मानवाधिकार संगठन
- श्रम विशेषज्ञ
- सोशल मीडिया एक्टिविस्ट
7. Swiggy और बाकी प्लेटफॉर्म्स पर असर
यह सिर्फ Zomato की कहानी नहीं।
- Swiggy
- Uber
- Rapido
- Amazon Flex
सभी प्लेटफॉर्म्स पर समान समस्याएं।
8. सरकार और श्रम कानूनों की भूमिका
भारत में नए श्रम कोड्स में Gig Workers शब्द जोड़ा गया है।
लेकिन:
- स्पष्ट अधिकार नहीं
- कोई तय न्यूनतम वेतन नहीं
- जिम्मेदारी तय नहीं
9. उपभोक्ता की नैतिक जिम्मेदारी
सस्ता खाना, तेज डिलीवरी – लेकिन किस कीमत पर?
10. हड़ताल का असर
- डिलीवरी प्रभावित
- ब्रांड इमेज पर असर
- नीति बहस तेज
11. आगे का रास्ता: समाधान क्या हो?
✔️ त्रिपक्षीय संवाद
कंपनी + कर्मचारी + सरकार
✔️ न्यूनतम मानक
- बेस पे
- बीमा
- पारदर्शी एल्गोरिदम
✔️ कानूनी स्पष्टता
कर्मचारी या पार्टनर – स्पष्ट परिभाषा।
यह Zomato नहीं, नए भारत की कहानी है
Zomato कर्मचारियों की हड़ताल भारत की गिग इकॉनमी का आईना है।

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