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Why Silver Crossed $100 in 2026: Global Economy और Geopolitics का विश्लेषण



🪙 Silver Price Surge 2026: $100 के पार चांदी और बदलते वैश्विक भू-राजनीतिक समीकरण

विशेष विश्लेषण | आम चर्चा न्यूज़ डेस्क

जनवरी 2026 में वैश्विक कमोडिटी बाजार ने एक असाधारण घटनाक्रम देखा। चांदी (Silver) की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार में $100 प्रति औंस के ऐतिहासिक स्तर को पार कर गईं। 

Silver prices cross $100 in 2026 

 भारत में इसका असर और भी गहरा रहा, जहाँ चांदी के भाव ₹3.5 लाख प्रति किलो के करीब पहुँच गए।

अब तक जिसे “गरीबों का सोना” कहा जाता था, वही चांदी आज रणनीतिक धातु (Strategic Metal) के रूप में वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था के केंद्र में आ चुकी है। यह उछाल केवल निवेशकों की मांग या औद्योगिक उपयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे चीन, रूस और अमेरिका के बीच चल रही भू-राजनीतिक खींचतान की एक गहरी कहानी छिपी है।


🔹 चांदी की कीमतों में ऐतिहासिक उछाल: सिर्फ़ बाजार नहीं, वैश्विक राजनीति की कहानी

पिछले पाँच वर्षों में चांदी की कीमतों में लगातार मजबूती देखी गई थी, लेकिन 2026 की शुरुआत में आई तेजी ने सभी अनुमानों को पीछे छोड़ दिया।

  • वर्ष 2020 में चांदी: लगभग $22 प्रति औंस
  • वर्ष 2024 में: $30–35 प्रति औंस
  • जनवरी 2026 में: $100 प्रति औंस से अधिक

विशेषज्ञों के अनुसार, यह उछाल पारंपरिक कमोडिटी साइकिल से अलग है। यह उस दौर की शुरुआत है जहाँ धातुएँ केवल संसाधन नहीं, बल्कि शक्ति के उपकरण बनती जा रही हैं।


🔹 Silver Market 2026: चांदी की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर क्यों पहुंचीं?

2026 में चांदी की मांग तीन बड़े कारणों से तेज़ हुई:

  1. औद्योगिक उपयोग में तेज़ बढ़ोतरी
    सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक वाहन (EV), सेमीकंडक्टर और AI डेटा सेंटर में चांदी की भूमिका अनिवार्य हो चुकी है।

  2. Safe Haven Demand
    वैश्विक अस्थिरता के बीच निवेशक सोने के साथ-साथ चांदी को सुरक्षित निवेश के रूप में देखने लगे हैं।

  3. Physical Silver की कमी
    कागज़ी चांदी (Paper Silver) मौजूद है, लेकिन वास्तविक भौतिक चांदी (Physical Silver) की उपलब्धता तेजी से घटी है।


🔹 चीन की नई नीति: चांदी को ‘रणनीतिक संसाधन’ घोषित करने का प्रभाव

चीन दुनिया के सबसे बड़े चांदी रिफाइनिंग और प्रोसेसिंग केंद्रों में से एक है।
1 जनवरी 2026 से चीन ने चांदी को आधिकारिक रूप से “रणनीतिक संसाधन” की श्रेणी में रख दिया।

चीन के फैसले के प्रमुख बिंदु:

  • चांदी के निर्यात पर कड़े लाइसेंस नियम
  • केवल 44 राज्य-अनुमोदित कंपनियों को निर्यात की अनुमति
  • घरेलू टेक, ऊर्जा और रक्षा क्षेत्रों को प्राथमिकता

इस नीति का असर यह हुआ कि वैश्विक बाजार में चांदी की आपूर्ति अचानक सीमित हो गई। विशेषज्ञ इसकी तुलना चीन द्वारा 2010 में अपनाई गई रेयर अर्थ मेटल नीति से कर रहे हैं, जिसने उस समय पूरी वैश्विक टेक इंडस्ट्री को प्रभावित किया था।


🔹 रूस की रणनीति: डॉलर निर्भरता घटाने में चांदी की भूमिका

यूक्रेन युद्ध के बाद रूस ने अपनी आर्थिक रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। पश्चिमी प्रतिबंधों के चलते रूस अब डॉलर-आधारित प्रणाली से दूरी बना रहा है।

रूस की सिल्वर रणनीति:

  • राज्य कोष के ज़रिए भारी मात्रा में चांदी की खरीद
  • सोने के साथ-साथ चांदी को रिज़र्व एसेट बनाना
  • चीन के साथ मिलकर वैकल्पिक मेटल मार्केट की दिशा में कदम

इसका नतीजा यह है कि चांदी की कीमतें अब केवल न्यूयॉर्क के पेपर मार्केट से नहीं, बल्कि एशियाई और यूरोपीय फिजिकल मार्केट से भी प्रभावित हो रही हैं।


🔹 वेनेजुएला संकट और वैश्विक अनिश्चितता का प्रभाव

2026 की शुरुआत में वेनेजुएला को लेकर बढ़े तनाव ने बाजार में अनिश्चितता को और बढ़ा दिया।
अमेरिका की सैन्य कार्रवाई और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी से:

  • निवेशकों में जोखिम की भावना बढ़ी
  • Safe Haven Assets की ओर तेज़ रुख हुआ
  • लैटिन अमेरिका से जुड़ी सप्लाई चेन बाधित हुई

इस भू-राजनीतिक घटनाक्रम ने चांदी की कीमतों में तेजी को और गति दी।


🔹 अमेरिका की चुनौतियाँ: ग्रीन एनर्जी, डॉलर और सिल्वर इन्वेंट्री

अमेरिका इस समय कई स्तरों पर दबाव महसूस कर रहा है।

1️⃣ ग्रीन एनर्जी पर असर

सोलर पैनल और EV सेक्टर में चांदी की कीमत बढ़ने से:

  • परियोजनाओं की लागत बढ़ी
  • सरकारी सब्सिडी मॉडल दबाव में आया

2️⃣ डॉलर की स्थिति

चीन और रूस के डि-डॉलराइजेशन प्रयास चांदी और सोने के माध्यम से आगे बढ़ते दिख रहे हैं, जिससे डॉलर की वैश्विक भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं।

3️⃣ COMEX इन्वेंट्री संकट

  • अमेरिकी एक्सचेंजों पर चांदी का भंडार ऐतिहासिक निचले स्तर पर
  • अनुमानित 200 मिलियन औंस से अधिक की कमी

🔹 भविष्य का अनुमान: चांदी की कीमतें आगे किस दिशा में जा सकती हैं?

कई वैश्विक विश्लेषकों और निवेश विशेषज्ञों का मानना है कि यदि:

  • चीन की निर्यात नीति जारी रहती है
  • रूस–चीन समन्वय मजबूत होता है
  • ग्रीन टेक्नोलॉजी की मांग बढ़ती है

तो आने वाले वर्षों में चांदी $150 से $200 प्रति औंस तक भी पहुँच सकती है।


🔹 चांदी का उछाल और बदलती वैश्विक आर्थिक व्यवस्था

चांदी की मौजूदा तेजी केवल एक कमोडिटी बूम नहीं है।
यह उस बदलती वैश्विक व्यवस्था का संकेत है जहाँ प्राकृतिक संसाधन, धातुएँ और सप्लाई चेन ही असली शक्ति बनते जा रहे हैं।

आज चांदी सिर्फ़ एक धातु नहीं, बल्कि भू-राजनीतिक रणनीति का अहम हिस्सा बन चुकी है।


आम चर्चा | विशेष विश्लेषण

Economy • Geopolitics • Global Power Shift



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