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BREAKING: पाकिस्तान-बांग्लादेश जिहादी गठबंधन से भारत को खतरा, क्या सिंदूर 2.0 तय है?

BREAKING: क्या भारत को सिंदूर 2.0 की ओर बढ़ना होगा? पाकिस्तान-बांग्लादेश गठजोड़ और नया दक्षिण एशिया संकट
🚨 BREAKING ANALYSIS | आम चर्चा स्पेशल

क्या भारत को सिंदूर 2.0 शुरू करना पड़ेगा? पाकिस्तान-बांग्लादेश गठजोड़ और भारत के सामने सबसे कठिन रणनीतिक परीक्षा

लेखक: आम चर्चा लखनऊ डेस्क
दिनांक: 28 दिसंबर 2025

दक्षिण एशिया एक बार फिर निर्णायक मोड़ पर खड़ा है। पाकिस्तान की आईएसआई, बांग्लादेश की बदलती सत्ता-संरचना और अमेरिका की रहस्यमयी चुप्पी — तीनों मिलकर भारत की रणनीतिक सहनशीलता की परीक्षा ले रहे हैं।

पाकिस्तान–बांग्लादेश: जिहादी धुरी का पुनर्जन्म?

पाकिस्तान की ISI लंबे समय से बांग्लादेश की राजनीति और समाज में घुसपैठ करती रही है। हालिया घटनाक्रमों में यह स्पष्ट दिखता है कि बांग्लादेश को भारत-विरोधी रणनीतिक मोहरे के रूप में इस्तेमाल करने की कोशिश तेज़ हुई है।

यह वही बांग्लादेश है जिसे भारत ने 1971 में अपने सैनिकों के रक्त और राजनीतिक साहस से जन्म दिया। आज वही ढाका भारत के राजदूत को तलब कर “आँख दिखाने” का दुस्साहस कर रहा है।

अमेरिका की भूमिका: मूक समर्थन या रणनीतिक उदासीनता?

अमेरिका की प्राथमिकता स्पष्ट है — चीन का कंटेनमेंट। इसी रणनीति के तहत पाकिस्तान को पूरी तरह अलग-थलग करने से वह बचता रहा है।

इसका अर्थ यह नहीं कि अमेरिका भारत के विरुद्ध युद्ध चाहता है, लेकिन यह ज़रूर संकेत देता है कि पाकिस्तान द्वारा फैलाए जा रहे Low Intensity Chaos पर वह आँख मूँद सकता है।

क्या 1971 की सारी मेहनत पर पानी फिर जाएगा?

यदि भारत केवल प्रतिक्रिया देता रहा और निर्णायक पहल नहीं की, तो 1971 की ऐतिहासिक उपलब्धि धीरे-धीरे क्षरण की ओर बढ़ सकती है।

यह सिर्फ हिंदुओं या अल्पसंख्यकों की सुरक्षा का प्रश्न नहीं है — यह भारत की मर्यादा, प्रभाव और भविष्य की वैश्विक भूमिका का प्रश्न है।

भारत के सामने विकल्प क्या हैं?

1️⃣ बांग्लादेश पर सीधा हमला नहीं, रणनीतिक शिकंजा

बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था भारत पर निर्भर है — बिजली, ट्रांजिट, व्यापार, चिकित्सा। भारत के पास लीवर हैं, मिसाइल नहीं

2️⃣ पाकिस्तान को उसके ही जाल में फँसाना

सीधा हमला बांग्लादेश पर नहीं, बल्कि पाक-अधिकृत कश्मीर (PoK) पर रणनीतिक दबाव। ताकि पाकिस्तान अपने ही घर को संभालने में उलझ जाए।

3️⃣ भारत का मौन = कमजोरी नहीं

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी टीम बिना शोर किए निर्णय लेने के लिए जानी जाती है। भारत जब बोलता है, तब फैसला पहले ही हो चुका होता है।

क्या सिंदूर 2.0 अपरिहार्य है?

आज नहीं — लेकिन यदि पाकिस्तान बांग्लादेश की धरती का इस्तेमाल भारत को अस्थिर करने के लिए करता है, तो भारत के पास विकल्प सीमित रह जाएंगे।

नया भारत न तो पिलपिला है, न ही भावनात्मक। नया भारत धैर्य रखता है — और ज़रूरत पड़ने पर निर्णायक वार करता है।

निष्कर्ष: निर्णय टल सकता है, संकट नहीं

भारत चुप नहीं बैठ सकता। क्योंकि यदि पड़ोस में कोई आपके हितों के विरुद्ध सक्रिय हो और आप मौन रहें — तो वह नया भारत नहीं, पुरानी भूल होगी।

यदि “सिंदूर 2.0” हुआ भी, तो वह सीमाओं पर नहीं — रणनीति, अर्थव्यवस्था और वैश्विक मंचों पर सबसे पहले दिखेगा।

आम चर्चा — क्योंकि राष्ट्रहित पर चुप्पी विकल्प नहीं।

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