बजट 2026 की असली तस्वीर: राघव चड्ढा ने क्यों कहा भारत एक ‘सैंडविच इकोनॉमी’ है
नई दिल्ली | विशेष संवाददाता
राज्यसभा में बजट 2026 पर चर्चा के दौरान आम आदमी पार्टी के सांसद राघव चड्ढा ने सरकार की आर्थिक नीतियों पर एक संतुलित लेकिन गहन विश्लेषणात्मक टिप्पणी प्रस्तुत की। उन्होंने विकास के बड़े सरकारी दावों और मध्यम वर्ग की जमीनी वास्तविकताओं के बीच बढ़ते अंतर को रेखांकित किया।
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| Raghav chadha speech on union budget 2026 |
‘सैंडविच इकोनॉमी’: नीति के बीच फंसा मध्यम वर्ग
राघव चड्ढा ने “सैंडविच इकोनॉमी” शब्द का प्रयोग करते हुए भारत की आर्थिक संरचना में मौजूद असंतुलन की ओर ध्यान दिलाया।
- ऊपरी तबका: कॉरपोरेट्स और उच्च आय वर्ग, जिन्हें नीतिगत प्रोत्साहन और कर राहत मिलती है।
- निचला तबका: आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग, जिन्हें सब्सिडी और कल्याणकारी योजनाओं का सहारा मिलता है।
- मध्यम वर्ग: न तो सब्सिडी का लाभ, न ही कर राहत— केवल कर बोझ।
चड्ढा के अनुसार,
मध्यम वर्ग अर्थव्यवस्था का वह हिस्सा है जो सबसे अधिक योगदान देता है, लेकिन नीति निर्धारण में सबसे अधिक उपेक्षित रहता है।महंगाई के दौर में ठहरी कर राहत: स्टैंडर्ड डिडक्शन पर सवाल
चड्ढा ने स्टैंडर्ड डिडक्शन को ₹75,000 से बढ़ाकर ₹1.5 लाख करने की मांग को तर्कसंगत बताया।
- शिक्षा, स्वास्थ्य और आवास की लागत में तेज़ वृद्धि
- वेतन वृद्धि की तुलना में महंगाई की तेज़ रफ्तार
- डिस्पोजेबल इनकम में लगातार गिरावट
उनका सवाल था कि जब सरकार महंगाई को स्वीकार करती है, तो कर ढांचे में उसका प्रतिबिंब क्यों नहीं दिखता।
महंगाई और जीएसटी: क्या बढ़ती कीमतें राजस्व का जरिया बन गई हैं?
चड्ढा ने अप्रत्यक्ष कर प्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि महंगाई बढ़ने से सरकार का जीएसटी संग्रह भी बढ़ता है।
“कीमतें बढ़ेंगी, तो जीएसटी अपने आप बढ़ेगा— ऐसे में महंगाई कम करने की प्रेरणा कहां है?”
यह टिप्पणी महंगाई और राजस्व नीति के बीच मौजूद अंतर्विरोध की ओर इशारा करती है।
कर्ज आधारित विकास मॉडल: तात्कालिक राहत, दीर्घकालिक चुनौती
बजट 2026 में बढ़ते सरकारी कर्ज पर चिंता जताते हुए चड्ढा ने कहा कि कर्ज से संचालित विकास भविष्य के लिए जोखिम पैदा करता है।
- ब्याज भुगतान का बढ़ता बोझ
- भविष्य में सामाजिक खर्च की सीमाएं
- आने वाली पीढ़ियों पर कर दबाव
उनके अनुसार, आज का विकास कल की समस्या बन सकता है।
बीमा पर जीएसटी: सुरक्षा को महंगा बनाने की नीति?
स्वास्थ्य और जीवन बीमा पर जीएसटी को लेकर चड्ढा ने इसे नीति विरोधाभास बताया।
पोस्ट-कोविड भारत में, जहां जोखिम बढ़ा है, वहां बीमा को सस्ता और सुलभ बनाना ज़रूरी है, न कि कर के बोझ से दूर करना।
कैपिटल गेन टैक्स और खुदरा निवेशक की दुविधा
छोटे निवेशकों के लिए कैपिटल गेन टैक्स में राहत की मांग करते हुए चड्ढा ने कहा कि निवेश को दंड नहीं, प्रोत्साहन मिलना चाहिए।
- निवेश से आर्थिक भागीदारी बढ़ती है
- अत्यधिक कर खुदरा निवेशकों को हतोत्साहित करता है
- बड़े निवेशकों को अपेक्षाकृत अधिक छूट मिलती है
खाद्य मिलावट: सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ा अनदेखा संकट
आर्थिक मुद्दों के साथ-साथ चड्ढा ने खाद्य मिलावट को भी एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या बताया।
कमज़ोर कानून, धीमी न्याय प्रक्रिया और सीमित दंड के कारण यह समस्या वर्षों से बनी हुई है।
आर्थिक वृद्धि और मध्यम वर्ग की वास्तविकता
बजट 2026 पर राघव चड्ढा का भाषण भारत की आर्थिक नीति पर एक गंभीर आत्ममंथन की मांग करता है। विकास के आंकड़े भले ही सकारात्मक हों, लेकिन जब तक मध्यम वर्ग की क्रय शक्ति और आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित नहीं होती, तब तक यह वृद्धि अधूरी रहेगी।
मध्यम वर्ग नीतियों का आधार है— उपेक्षा नहीं।
क्योंकि किसी भी अर्थव्यवस्था की असली मजबूती उसी वर्ग से आती है, जो सबसे अधिक जिम्मेदारी उठाता है।



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