साल 2026 की शुरुआत दुनिया के लिए किसी शांत सुबह की तरह नहीं, बल्कि एक साथ कई दिशाओं से उठती आग की तरह हो रही है।
पश्चिम एशिया से लेकर पूर्वी यूरोप तक सत्ता, सड़कों और सीमाओं पर उबाल साफ़ दिखाई दे रहा है।ईरान में सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़पों में आठ लोगों की मौत को जब संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद की एक अधिकारी “हत्या” कहती है, तो यह केवल एक मानवीय टिप्पणी नहीं रह जाती। यह शब्द अंतरराष्ट्रीय राजनीति में दबाव, प्रतिबंध और कूटनीतिक अलगाव का संकेत बन जाता है।
ईरान में Gen G: डर के बाद की पीढ़ी
0ईरान में उभर रही नई पीढ़ी को पश्चिम Gen Z कहता है, लेकिन ईरान की सड़कों पर यह पीढ़ी अब Gen G के नाम से पहचानी जा रही है—एक ऐसी पीढ़ी जो डर की सीमा पार कर चुकी है।
1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद जन्मे इन युवाओं ने न क्रांति का उत्साह देखा, न बदलाव की उम्मीद। उन्होंने केवल प्रतिबंध, बेरोज़गारी, नैतिक पुलिस और बंद भविष्य देखा है।
महसा अमिनी के बाद भी खत्म न हुआ आंदोलन
1महसा अमिनी की मौत के बाद शुरू हुआ आंदोलन कभी पूरी तरह रुका नहीं। वह समय-समय पर सतह के नीचे सुलगता रहा और 2025–26 में फिर विस्फोटक रूप में सामने आया।
आज नारे केवल हिजाब या नैतिक पुलिस तक सीमित नहीं हैं। अब सवाल सीधे सत्ता संरचना पर हैं।
“हत्या” शब्द और अंतरराष्ट्रीय दबाव
2संयुक्त राष्ट्र द्वारा “हत्या” शब्द का इस्तेमाल ईरान के लिए केवल आलोचना नहीं, बल्कि संभावित जांच और वैश्विक अलगाव का संकेत है।
डिजिटल हथियार और सत्ता की घबराहट
Gen G की ताकत उसका डिजिटल नेटवर्क है—VPN, सोशल मीडिया और वैश्विक संवाद। यही कारण है कि सत्ता इंटरनेट बंद करने और डिजिटल दमन पर उतर आती है।
ट्रंप, अमेरिका और ईरान की असुरक्षा
3अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयानों पर ईरान की तीखी प्रतिक्रिया यह दिखाती है कि आंतरिक अस्थिरता ने सत्ता को कितना संवेदनशील बना दिया है।
लौटने वाली नहीं है पुरानी स्थिरता
ईरान में Gen G का आंदोलन तात्कालिक क्रांति की गारंटी नहीं देता, लेकिन यह तय करता है कि पुरानी स्थिरता अब इतिहास बन चुकी है।
— आमचर्चा विशेष विश्लेषण

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