बीजेपी का चंदा: भारत की साइलेंट राइज का आर्थिक इंजन या लोकतंत्र का सबसे बड़ा संकट?
भारत की राजनीति में पैसा हमेशा मौजूद रहा है, लेकिन इक्कीसवीं सदी के तीसरे दशक में पैसा केवल चुनाव जिताने का साधन नहीं रहा। वह अब राज्य की दिशा, मीडिया का स्वर, न्यायपालिका की सीमाएँ, डिजिटल नैरेटिव और वैश्विक छवि गढ़ने वाली शक्ति बन चुका है। इसी संदर्भ में भारतीय जनता पार्टी के खाते में आने वाला चंदा एक सामान्य राजनीतिक तथ्य नहीं, बल्कि भारत की बदलती सत्ता–संरचना का एक्स–रे है।
आज बीजेपी का फंड भारत के लोकतंत्र में सबसे शक्तिशाली गैर–संवैधानिक संस्था बन चुका है। यह संसद से ज़्यादा प्रभावी, मीडिया से ज़्यादा मुखर और विपक्ष से कहीं ज़्यादा संगठित शक्ति है।
पिछले 10 सालों में मुख्य राजनीतिक दलों को मिले चंदे की तालिका
| वित्तीय वर्ष (FY) | बीजेपी (₹ करोड़) | कांग्रेस (₹ करोड़) | AAP (₹ करोड़) | अन्य राष्ट्रीय/क्षेत्रीय दलों |
|---|---|---|---|---|
| 2015–16 | ~2,800* | ~950* | ~10* | ~450* |
| 2016–17 | ~5,272** | ~1,784** | ~15* | ~780* |
| 2017–18 | ~3,900* | ~1,200* | ~20* | ~600* |
| 2018–19 | ~4,500* | ~1,100* | ~25* | ~700* |
| 2019–20 | ~5,100* | ~1,000* | ~30* | ~650* |
| 2020–21 | ~4,800* | ~900* | ~35* | ~620* |
| 2021–22 | ₹614 | ₹180 | ₹15 | ₹300 |
| 2022–23 | ₹719 | ₹210 | ₹22 | ₹350 |
| 2023–24 | ₹2,243.95 | ₹281.48 | ₹22.68 | ₹410+ |
| 2024–25 | ₹6,654.93 | ₹522.11 | ₹39.2 | ₹600+ |
*अनुमानित/एचिंट डेटा; **चुनावी बॉन्ड और सार्वजनिक रिपोर्ट के आधार पर
FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)
1. बीजेपी को सबसे अधिक चंदा क्यों मिलता है?
बीजेपी को मुख्यतः कॉरपोरेट दान, उच्च मूल्य वाले निजी दान और चुनावी बॉन्ड के माध्यम से सब्सटैंशल फंड मिलता है, जिससे वह चुनावी मशीनरी, डिजिटल प्रचार और संगठनात्मक विस्तार को भारी पैमाने पर चला पाती है।
2. चुनावी बॉन्ड क्या हैं?
चुनावी बॉन्ड एक वित्तीय उपकरण हैं जिन्हें कंपनियाँ राजनीतिक पार्टियों को दान के रूप में खरीद सकती हैं। इससे दाता का पहचान गोपनीय रह सकती है।
3. क्या अन्य पार्टियों को भी इतना दान मिलता है?
मिलता है, लेकिन बीजेपी के मुकाबले अन्य प्रमुख राष्ट्रीय पार्टियों के पास कम संसाधन होते हैं, जिससे उनकी प्रचार क्षमता सीमित रह जाती है।
भारत राजनीति, बीजेपी चंदा, राजनीतिक दान, चुनावी फंडिंग, राजनीतिक विश्लेषण, भारत @2047

0 टिप्पणियाँ