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India–EU Summit 2026: Republic Day Diplomacy and a New Global Axis

🇮🇳🤝🇪🇺 भारत–यूरोपीय संघ शिखर बैठक 2026

गणतंत्र दिवस से रक्षा समझौते तक: बदलती वैश्विक राजनीति में भारत–EU रणनीतिक साझेदारी

25 से 27 जनवरी 2026 के बीच भारत में आयोजित भारत–यूरोपीय संघ (EU) शिखर बैठक

केवल एक औपचारिक कूटनीतिक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह बदलती वैश्विक शक्ति-संरचना का स्पष्ट संकेत देती है। यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन का गणतंत्र दिवस पर मुख्य अतिथि के रूप में भारत आना दर्शाता है कि भारत अब यूरोप की विदेश नीति में एक केंद्रीय स्तंभ बन चुका है।

छह दशकों से अधिक पुराने भारत–EU संबंध अब ऐसे चरण में प्रवेश कर चुके हैं जहाँ व्यापार, रक्षा, तकनीक और भू-राजनीति एक-दूसरे से गहराई से जुड़ गए हैं। यह शिखर बैठक उसी बहुआयामी साझेदारी को ठोस रूप देने का प्रयास है।

भारत–EU संबंधों का ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य

1962 में यूरोपीय आर्थिक समुदाय के साथ भारत के संबंधों की शुरुआत हुई थी। लंबे समय तक यह रिश्ता विकास सहायता और सीमित व्यापार तक ही सिमटा रहा। 2004 में रणनीतिक साझेदारी घोषित हुई, लेकिन रक्षा और राजनीतिक सहयोग अपेक्षित गति नहीं पकड़ सका। 2026 की शिखर बैठक उसी ऐतिहासिक कमी को भरने की कोशिश है।

गणतंत्र दिवस और कूटनीतिक संदेश

पूरे यूरोपीय संघ के शीर्ष नेतृत्व को गणतंत्र दिवस पर आमंत्रित करना केवल प्रतीकात्मक कदम नहीं है। यह चीन और अमेरिका दोनों के लिए स्पष्ट संकेत है कि भारत अब किसी एक ध्रुव पर निर्भर नहीं, बल्कि स्वतंत्र रणनीतिक शक्ति के रूप में उभर रहा है।

मुक्त व्यापार समझौता (FTA): दो दशक बाद निर्णायक मोड़

भारत–EU मुक्त व्यापार समझौता पिछले लगभग 20 वर्षों से लंबित रहा है। डेटा सुरक्षा, कृषि सब्सिडी, बौद्धिक संपदा अधिकार और कार्बन बॉर्डर टैक्स जैसे मुद्दे बाधा बने। अब 24 में से 20 अध्यायों पर सहमति बनना दर्शाता है कि दोनों पक्ष इसे केवल आर्थिक नहीं, बल्कि भू-राजनीतिक आवश्यकता मान रहे हैं।

इस FTA से भारत के टेक्सटाइल, फार्मा, ऑटो कंपोनेंट्स और IT सेक्टर को बड़ा लाभ मिल सकता है, जबकि यूरोपीय कंपनियों के लिए भारत एक विशाल और स्थिर बाजार बनेगा।

रक्षा और सुरक्षा साझेदारी: नए युग की शुरुआत

इस शिखर बैठक का सबसे महत्वपूर्ण पहलू प्रस्तावित Security of Information Agreement (SOIA) है। इसके तहत भारत और EU पहली बार क्लासीफाइड रक्षा और सैन्य सूचनाओं का आदान–प्रदान कर सकेंगे।

आतंकवाद-रोधी अभियानों, साइबर सुरक्षा, समुद्री निगरानी और खुफिया सहयोग में यह समझौता गेम-चेंजर साबित हो सकता है। फ्रांस और जर्मनी जैसे देश भारत को केवल हथियारों का बाजार नहीं, बल्कि सह-निर्माण साझेदार के रूप में देख रहे हैं।

समुद्री सुरक्षा और इंडो–पैसिफिक रणनीति

हिंद महासागर, लाल सागर और अफ्रीकी तट पर बढ़ती अस्थिरता के बीच भारत और EU की साझा चिंता समुद्री सुरक्षा है। EUNAVFOR और भारतीय नौसेना के बीच सहयोग ड्रोन हमलों, समुद्री लुटेरों और सप्लाई चेन खतरों से निपटने में अहम भूमिका निभाएगा।

उभरती रक्षा और रणनीतिक तकनीकें

भविष्य का युद्ध केवल ज़मीन पर नहीं, बल्कि साइबर स्पेस और अंतरिक्ष में लड़ा जाएगा। साइबर डिफेंस, सैटेलाइट डेटा साझाकरण और स्पेस डेब्रिस पर सहयोग भारत–EU साझेदारी के नए आयाम हैं।

कुशल कार्यबल, शिक्षा और मोबिलिटी

यूरोपीय संघ को युवा और कुशल कार्यबल की सख्त आवश्यकता है। प्रस्तावित मोबिलिटी फ्रेमवर्क भारतीय छात्रों, शोधकर्ताओं और IT पेशेवरों के लिए यूरोप में अवसरों को आसान बनाएगा। यह ब्रेन ड्रेन नहीं, बल्कि ब्रेन सर्कुलेशन की अवधारणा को मजबूत करता है।

चीन फैक्टर और डी-रिस्किंग रणनीति

यूरोपीय संघ भारत को चीन पर अत्यधिक निर्भरता से बाहर निकलने के विश्वसनीय विकल्प के रूप में देख रहा है। सप्लाई चेन डी-रिस्किंग और रणनीतिक स्वायत्तता के लिए भारत–EU साझेदारी निर्णायक बनती जा रही है।

ट्रंप फैक्टर और अमेरिकी अनिश्चितता

अमेरिका में संरक्षणवादी नीतियों, टैरिफ और “अमेरिका फर्स्ट” दृष्टिकोण की वापसी की आशंकाओं के बीच भारत और EU अपने विकल्पों में विविधता ला रहे हैं। यह शिखर बैठक उसी रणनीतिक हेजिंग का हिस्सा है।

रूस–यूक्रेन युद्ध और नियम-आधारित व्यवस्था

हालाँकि रूस–यूक्रेन युद्ध पर भारत और EU के दृष्टिकोण पूरी तरह समान नहीं हैं, लेकिन नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को बनाए रखने पर संवाद का यह मंच बेहद अहम है।

आम चर्चा की टिप्पणी:
भारत–EU शिखर बैठक 2026 यह साफ़ करती है कि भारत अब केवल उभरती शक्ति नहीं, बल्कि वैश्विक राजनीति में निर्णायक भूमिका निभाने को तैयार शक्ति है। यूरोपीय संघ के लिए भारत लोकतांत्रिक और रणनीतिक विकल्प है, जबकि भारत के लिए EU तकनीक, निवेश और वैश्विक संतुलन का भरोसेमंद साझेदार। आने वाला दशक काफी हद तक इसी साझेदारी की दिशा से तय होगा।

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