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क्या ग्रीनलैंड अगला यूक्रेन बन सकता है? आर्कटिक में अमेरिका-यूरोप-चीन की नई जंग

Aam Charcha News | Global Reality 

ग्रीनलैंड को लेकर हालिया बयानबाज़ी को अगर अब भी कोई मज़ाक समझ रहा है, तो वह बदलती वैश्विक राजनीति को नहीं समझ रहा।

यूक्रेन भी कभी अचानक युद्धभूमि नहीं बना था।

ग्रीनलैंड दुनिया का सबसे बड़ा द्वीप है, लेकिन इसकी असली ताक़त इसके नीचे और इसके चारों ओर छुपी है। यह दुर्लभ खनिजों, भविष्य की बैटरी इंडस्ट्री और आर्कटिक समुद्री रास्तों की चाबी है।

अमेरिका पहले से ग्रीनलैंड में सैन्य मौजूदगी रखता है और इसे चीन–रूस के खिलाफ अगला मोर्चा मानता है। यूरोप में इसे सहयोग नहीं, बल्कि रणनीतिक दबाव के रूप में देखा जा रहा है।

यूरोप पहले ही यूक्रेन युद्ध से हिल चुका है। अब ग्रीनलैंड का नाम आते ही डर गहरा गया है, क्योंकि यूक्रेन भी कभी “रणनीतिक बफर” कहा गया था।

इसी बीच चीन बिना शोर किए आगे बढ़ रहा है। आर्कटिक रिसर्च, खनिज निवेश और Polar Silk Road की तैयारी— यही चीन की रणनीति है।

रूस के लिए आर्कटिक नया नहीं है। यूक्रेन युद्ध के बाद उसने यहाँ सैन्य मौजूदगी और बढ़ा दी है।

ग्रीनलैंड में अभी युद्ध नहीं है, लेकिन संकेत वही पुराने हैं— रणनीतिक महत्व, बाहरी दबाव और कमजोर स्थानीय नियंत्रण।

आज ग्रीनलैंड पर हो रही बहस असल में यूरोप के भविष्य की बहस है। इस नई दुनिया में दोस्त कम हैं और हित ज़्यादा।


Aam Charcha Reality Explainer

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